उत्तर प्रदेश में रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़े खरीदारों और निवेशकों के लिए बड़ी राहत की खबर है। यूपी रेरा ने फ्लैट ट्रांसफर के नाम पर वसूली जाने वाली मनमानी फीस पर सख्त सीमा तय कर दी है। नए नियम 25 मार्च 2026 से लागू हो चुके हैं, जिसके बाद बिल्डर अब निर्धारित सीमा से अधिक शुल्क नहीं ले सकेंगे।
परिवार में ट्रांसफर पर न्यूनतम फीस तय
नए प्रावधानों के तहत, अगर किसी फ्लैट मालिक की मृत्यु हो जाती है और संपत्ति परिवार के सदस्य के नाम ट्रांसफर की जाती है, तो बिल्डर अधिकतम 1000 रुपये तक ही प्रोसेसिंग फीस ले सकेगा। इससे पहले इस प्रक्रिया के नाम पर हजारों से लेकर लाखों रुपये तक वसूले जाते थे।
हालांकि, इसके लिए जरूरी दस्तावेज जमा करने होंगे, जिनमें मृत्यु प्रमाण पत्र, एसडीएम या डीएम द्वारा जारी उत्तराधिकार प्रमाण पत्र और सभी कानूनी वारिसों की एनओसी शामिल है।
तीसरे व्यक्ति को बेचने पर भी सीमा तय
अगर कोई फ्लैट मालिक अपनी संपत्ति किसी गैर-पारिवारिक व्यक्ति को बेचता है, तो भी बिल्डर की फीस पर कैप लगा दिया गया है। अब इस स्थिति में अधिकतम 25,000 रुपये तक ही ट्रांसफर फीस ली जा सकेगी। पहले यह राशि 50,000 से लेकर 2 लाख रुपये तक पहुंच जाती थी, जिससे खरीदारों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता था।
अनरजिस्टर्ड प्रोजेक्ट के खरीदारों को भी मिला अधिकार
यूपी रेरा के 10वें संशोधन के तहत एक और अहम बदलाव किया गया है। अब अनरजिस्टर्ड प्रोजेक्ट के खरीदार भी रेरा के पास शिकायत दर्ज करा सकेंगे। पहले ऐसे मामलों में खरीदारों के पास कोई स्पष्ट कानूनी विकल्प नहीं होता था।
इसके साथ ही, ट्रांसफर प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए नया एग्रीमेंट बनाने की जरूरत खत्म कर दी गई है। अब मौजूदा एग्रीमेंट में ही बदलाव दर्ज कर ट्रांसफर पूरा किया जा सकेगा, जिससे कागजी प्रक्रिया कम होगी और समय की बचत होगी।
रेरा चेयरमैन का बयान
यूपी रेरा के चेयरमैन संजय भूसरेड्डी ने कहा कि ये नए प्रावधान शिकायत निवारण प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी, कुशल और उपभोक्ता हितैषी बनाएंगे। उन्होंने बताया कि ये बदलाव रेगुलेशन 24 और 47 में संशोधन के तहत लागू किए गए हैं।
साथ ही, अनरजिस्टर्ड प्रोजेक्ट से जुड़ी शिकायतों के लिए जल्द ही यूपी रेरा पोर्टल पर फॉर्म-M की सुविधा भी शुरू की जाएगी।