शिव जी के जलाभिषेक तक बिना रुके लगातार चलती हैं डाक कांवड़, जानिए कितनी कठिन हैं यात्रा

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नई दिल्ली: सावन माह शिवभक्तों के लिए बेहद ही खास महीना होता है जिसमें सावन सोमवार के अलावा कांवड़ यात्रा भी निकाली जाती है। कांवड़ यात्रा का हिन्दू धर्म में अलग महत्व होता है इसमें कांवड़िए यात्रा के दौरान कांवड़ हिंदू तीर्थ स्थानों से गंगा जल लाने के लिए हरिद्वार जाते हैं और फिर प्रसाद चढ़ाते हैं। इस दौरान भक्त भगवान शिव की कृपा में लीन होते है। जल कांवड़ यात्रा का तो महत्व होता है लेकिन क्या आपके डाक कांवड़ यात्रा का नाम सुना है जिसे कांवड़ यात्रा में सबसे कठिन यात्रा में से एक माना जाता है।

जानिए कांवड़ यात्रा के प्रकार
आपको बताते चलें, कांवड़ यात्रा मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है पहली डाक कांवड़ और दूसरी खड़ी कांवड़ यात्रा। डाक कांवड़ यात्रा में कांवड़िए बिना रुके हुए यात्रा पूरी करते हैं और खड़ी कांवड़ यात्रा में मुख्य कांवड़ियों के साथ उनके सहयोगी अपने कंधे पर उनकी कांवड़ ले लेते हैं और कांवड़ को लेकर वह एक ही जगह पर खड़े रहते हैं। इधर डाक कांवड़ यात्रा भले की कठिन क्यों न हो लेकर शिव भक्त भोले की भक्ति में लीन होकर इस यात्रा को पूरा जरूर करते हैं।

जानिए कितनी कठिन होती है डाक कांवड़ यात्रा
ज्योतिषाचार्य एवं वास्तु विशेषज्ञ डॉ आरती दहिया जी ने बताया, कांवड़ यात्रा में सबसे कठिन डाक कांवड़ यात्रा होती है जिसमें कांवड़िएं बिना रूके लगातार चलते जाते है। कहते हैं इस डाक यात्रा में आराम करने की मनाही होती है। वहीं पर जब एक बार में कांवड़िएं, कांवड़ उठा लेते हैं तब बिना गंतव्य तक पहुंचे हुए वो रुकते नहीं हैं। डाक कांवड़ियों को एक निश्चित समय सीमा के अंदर ही शिवालय में जलाभिषेक करना होता है। इस दौरान चलते हुए मूत्र- मल भी नहीं त्यागते हैं। अगर गलती से नियमों को तोड़ा तो, यात्रा को खंडित मान लिया जाता है। इस दौरान डाक कांवड़िएं कभी समूह में चलते है तो कभी वाहन के साथ।

जानिए डाक कांवड़ यात्रा के नियम
डाक कांवड़ यात्रा के दिन कांवड़िएं को नियमो का पालन करना जरूरी होता है जो इस प्रकार है..

1- यह यात्रा नियमों के अनुसार पैदल करना जरूरी माना जाता है।
2- इस कांवड़ यात्रा में कांवड़िएं को तामसिक करने की मनाही होती है वें केवल सात्विक भोजन ही कर सकते है।
3- यात्रा में शामिल कांवड़ियों को किसी भी नशे का सेवन करने की भी मनाही होती है।
4- कठिन होने के साथ ही यात्रा पवित्र मानी जाती है जिसमें मन के साथ शरीर की शुद्धि भी जरूरी होती है।
5- कांवड़ लेने के बाद शिव जी के जलाभिषेक तक बिना रुके लगातार चलती है।
6- यात्रा में कांवड़ को लेकर रुकने और नीचे रखने की अनुमति नहीं होती है।

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