तबास में 1980 की ‘ऐतिहासिक हार’ का जिक्र कर ईरान ने अमेरिका पर साधा निशाना, राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने ट्रंप को दिलाई घटना की याद

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तेहरान से एक बार फिर ईरान-अमेरिका संबंधों में ऐतिहासिक घटनाओं का जिक्र सामने आया है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने 1980 में तबास में अमेरिका के असफल सैन्य अभियान का उल्लेख करते हुए इसे “घमंडी ताकतों के लिए सबक” बताया है। उन्होंने इस घटना को 5 मई की वर्षगांठ पर याद किया और सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए अमेरिका पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधा।

पेजेश्कियन का बयान और ट्रंप पर अप्रत्यक्ष संदेश
राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने एक्स पर लिखा कि तबास में अमेरिका की हार ईश्वरीय शक्ति का उदाहरण थी और ऐसी घटनाएं दुनिया की ताकतवर देशों के लिए सबक होनी चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस वर्ष भी दक्षिणी इस्फहान क्षेत्र में इसी तरह की घटनाओं ने “ईश्वरीय संरक्षण” को दर्शाया।

क्या था ऑपरेशन ईगल क्लॉ
यह घटना 1980 में अमेरिका के “ऑपरेशन ईगल क्लॉ” से जुड़ी है। नवंबर 1979 में ईरान की इस्लामी क्रांति के दौरान तेहरान स्थित अमेरिकी दूतावास पर छात्रों ने कब्जा कर लिया था और 53 अमेरिकी राजनयिकों को बंधक बना लिया गया था। इन्हें छुड़ाने के लिए तत्कालीन राष्ट्रपति जिमी कार्टर ने एक गुप्त सैन्य अभियान की मंजूरी दी थी।

तबास में कैसे फेल हुआ अमेरिकी मिशन
अमेरिकी सेना ने हेलीकॉप्टरों और C-130 विमानों के साथ रेगिस्तानी इलाके में ऑपरेशन शुरू किया, लेकिन खराब मौसम, रेत के तूफान और तकनीकी खराबियों ने पूरे मिशन को विफल कर दिया। आठ हेलीकॉप्टरों में से केवल पांच ही काम कर पाए, जबकि अभियान सफल बनाने के लिए कम से कम छह हेलीकॉप्टर जरूरी थे। स्थिति बिगड़ने पर मिशन को बीच में ही रद्द करना पड़ा।

हादसे में अमेरिकी सैनिकों की मौत
वापसी के दौरान एक हेलीकॉप्टर और C-130 विमान के बीच टक्कर हो गई, जिससे भीषण आग लग गई और आठ अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई। यह अभियान बिना किसी बंधक को छुड़ाए पूरी तरह विफल हो गया, जिसे अमेरिका के लिए बड़ी असफलता माना जाता है।

ईरान में क्यों माना जाता है ऐतिहासिक जीत
ईरान में इस घटना को अपनी सुरक्षा और रणनीतिक सफलता के रूप में देखा जाता है। 5 मई को तबास में मारे गए अमेरिकी सैनिकों के शव लौटाए जाने के बाद इस घटना को विशेष रूप से याद किया जाता है। ईरान इसे अपनी “ईश्वरीय जीत” के रूप में प्रस्तुत करता है, जबकि अमेरिका के लिए यह एक सैन्य विफलता थी।

 

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