लखनऊ में साइबर पंचायत का आयोजन, ग्रामीणों को सिखाए साइबर सुरक्षा के गुर; मेंटल हेल्थ को लेकर भी किया गया जागरूक
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सोमवार को ‘साइबर पंचायत’ का आयोजन किया गया, जिसमें ग्रामीणों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया और मानसिक स्वास्थ्य (मेंटल हेल्थ) के महत्व को समझाया गया। यह कार्यक्रम सरोजिनी नगर के हसनपुर खेवली प्राथमिक विद्यालय में साइनेरी वेलफेयर फाउंडेशन और आरटी साइबर अकादमी के सहयोग से आयोजित हुआ।
डिजिटल युग में तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों और ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल फोन के बढ़ते उपयोग को देखते हुए इस पहल को बेहद अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता की कमी के कारण लोग साइबर ठगी का आसान शिकार बन रहे हैं, इसलिए ऐसे जागरूकता कार्यक्रम समय की जरूरत हैं।
ग्रामीण इलाकों में बढ़ रहा साइबर अपराध का खतरा
कार्यक्रम में बताया गया कि ऑनलाइन धोखाधड़ी, फर्जी कॉल, ओटीपी स्कैम और सोशल मीडिया के दुरुपयोग के मामले ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहे हैं। इसके साथ ही म्यूल अकाउंट जैसी खतरनाक प्रवृत्ति भी सामने आ रही है, जिसमें लोगों को छोटे लालच देकर उनके बैंक खाते और दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल किया जाता है।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि कई बार अनजान ग्रामीण ऐसे मामलों में फंसकर पुलिस कार्रवाई और कानूनी परेशानियों का सामना करते हैं। इसलिए जागरूकता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।
मेंटल हेल्थ पर भी दिया गया जोर
साइबर पंचायत के दौरान मानसिक स्वास्थ्य पर भी विशेष चर्चा की गई। बताया गया कि अत्यधिक स्क्रीन टाइम और डिजिटल निर्भरता के कारण तनाव, चिंता, अकेलापन और सामाजिक अलगाव जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं, खासकर बच्चों और युवाओं में।
विशेषज्ञों ने कहा कि भावनात्मक स्वास्थ्य और सामुदायिक सहयोग एक स्वस्थ समाज की नींव हैं। डिजिटल सुरक्षा के साथ-साथ मानसिक मजबूती भी उतनी ही जरूरी है।
विशेषज्ञों ने दी महत्वपूर्ण जानकारी
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ रक्षित टंडन ने ग्रामीणों को ऑनलाइन धोखाधड़ी, फर्जी कॉल, ओटीपी स्कैम और सोशल मीडिया से जुड़े खतरों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जागरूकता और सतर्कता ही साइबर अपराध से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।
वहीं मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ आर्ची अनुराज ने तनाव और डिजिटल लत के मनोवैज्ञानिक प्रभावों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि खुले संवाद और सामुदायिक सहयोग से मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाया जा सकता है।
शॉर्ट फिल्म के जरिए दी गई जानकारी
कार्यक्रम के दौरान साइबर सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य पर आधारित एक शॉर्ट फिल्म भी दिखाई गई, जिससे लोगों को विषय को सरल तरीके से समझने में मदद मिली। उपस्थित लोगों ने सुरक्षित डिजिटल आदतें अपनाने और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने का संकल्प लिया।
पहले भी हो चुका है ऐसा आयोजन
गौरतलब है कि इससे पहले अप्रैल में सरोजिनी नगर के पिपरसंड गांव में भी साइबर पंचायत का आयोजन किया गया था। यह पहल ग्रामीण भारत को डिजिटल रूप से सुरक्षित और मानसिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।